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क्या होता कलाई का दर्द? जानें, इसके लक्षण, कारण और उपचार

क्या होता कलाई का दर्द? जानें, इसके लक्षण, कारण और उपचार

कलाई वह जोड़ है, जो हथेलियों और हाथ को जोड़ता है। कलाई में कई छोटी हड्डियां होती हैं. जो व्यक्ति की बाहें और कलाई को मोड़ने, सीधा करने और घुमाने में मदद करती हैं। कभी-कभी कलाई में दर्द उत्पन्न हो जाता है। इसका मुख्य कारण कलाई पर आघात और मांसपेशियों में खिंचाव हैं जो कलाई के हर अंगों को प्रभाव��त करता है। जिसमें हड्डियों, स्नायुबंधन और संयोजी ऊतक शामिल हैं। इसके अलावा यह मोच, फ्रैक्चर, थकान या किसी बड़ी समस्या के कारण भी होता है। साथ ही कलाई में दबी हुई नसें भी दर्द का कारण बन सकती हैं।

कलाई में दर्द के कारण-

दर्द कई कारणों से होता है। इसका मुख्य निम्नलिखित हैं-

  • कलाई की मोच-लिगामेंट में किसी प्रकार की चोट आदि को मोच कहा जाता है। लिगामेंट कठोर, लचीले और रेशेदार ऊतक होते हैं। जो जोड़ों में दो हड्डियों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। मोच के दौरान लिगामेंट में थोड़ी बहुत चोट लगने से यहां कि मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। जिससे व्यक्ति को अधिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। मोच के कारण होने वाले लक्षण निम्नलिखित हैं:
  • कलाई को घुमाते समय दर्द होना।
  • जोड़ों के आसपास सूजन।
  • सूजन व नीला पड़ना।
  • जलन या झनझनाहट होना जिसे पैरेस्थेसिया कहा जाता है।
  • कलाई टेंडोनाइटिस-टेंडन मजबूत ऊतक होते हैं, जो कलाई से गुजरते हैं। यह हाथ की मांसपेशियों को हाथ की हड्डियों और उंगलियों से जोड़ते हैं। हथेली के फ्लेक्सर टेंडन उंगलियों से वस्तुओं को पकड़ने की अनुमति देते हैं। हाथ के शीर्ष पर एक्स्टेंसर टेंडन होते हैं, जो उंगलियों को सीधा करने और वस्तुओं को छोड़ने में मदद करता है। कलाई टेंडोनाइटिस की स्थिति तब होती है जब इसमें से एक या अधिक टेंडन सूज जाते हैं। इसके कुछ लक्षण निम्नलखित हैं:
  • सुबह की जकड़न।
  • जोड़ों के आस-पास हल्का सूजन।
  • कुछ लोग कलाई को हिलाने पर क्रेपिटस अर्थात जोडों से आवाज आते हैं।
  • कलाई टेंडोनाइटिस के आम कारण हैं: बार-बार कलाई को घूमना या मशीन चलाना। बार-बार कलाई पर दबाव पड़ने वाले खे��� जैसे गोल्फ या टेनिस खेलना।
  • कार्पल टनल सिंड्रोम-कार्पल टनल सिंड्रोम कलाई पर अधिक तनाव के कारण होता है। विशेष रूप से दोहराव गति अर्थात बार-बार कलाई को हिलाने-डुलाने से। यह सूजन और निशान का कारण बनता है। यह कलाई से गुजरने वाली नसों को संकुचित करते हैं। जिसे माध्यिका तंत्रिका कहते हैं। यह स्थिति दर्द का कारण बनती है जो रात में बढ़ जाती है। साथ ही हथेलियों, अंगूठे और उंगलियों में झनझनाहट उत्पन्न करती है।
  • अर्थराइटिस-विभिन्न प्रकार के अर्थराइटिस कलाई को प्रभावित करते हैं। जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
  • रुमेटी गठिया (आरए)- रुमेटी गठिया में व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिसके कारण उसके जोड़ों में असहनीय दर्द होता है। साथ ही शरीर के अन्य अंगों में सूजन आने लगती है।
  • गाउटगाउट की स्थिति तब होती है जब रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। इस स्थिति में व्यक्ति जब कुछ देर के लिए आराम करता है तो यूरिक एसिड पैर के अंगूठे या जोड़ों में इकठ्ठा होकर क्रिस्टल का रूप ले लेते हैं। जिससे व्यक्ति को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है।
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस- ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों की छोर को कवर करने वाला लचीला पदार्थ, जिसे उपास्थि (Cartilage) कहते हैं। वह अपनी जगह से खिसक या टूट जाते हैं। इससे जोड़ों को हिलाने में अत्यधिक दर्द, सूजन और कठिनाई होती है।
  • कलाई फ्रैक्चर-कलाई का फ्रैक्चर एक प्रकार की चोट है। यह कमजोर हड्डियों वाले लोगों में होने की अधिक संभावना होती है, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस। दरअसल ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या एक ऐसी स्थिति होती है। जिसमें हड्डियों की गुणवत्ता और घनत्व कम हो जाता है। इसके अलावा स्केफॉइड फ्रैक्चर भी कलाई फ्रैक्चर का एक प्रकार होता है। जो अंगूठे के नीचे सूजन, दर्द और कोमलता का कारण बनता है।
  • कलाई में दर्द के लक्षण-कलाई में दर्द के लक्षण इसके कारण के आधार पर अलग-अलग होते हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस दर्द को अक्सर सुस्त दांत दर्द के समान वर्णित किया जाता है। वहीं कार्पल टनल सिंड्रोम आमतौर पर सुन्नता या झुनझुनी का कारण बनता है, खासकर रात में। इस प्रकार कलाई के दर्द का लक्षण होने वाले कारणों से पता चलता है।

कलाई के दर्द को कैसे रोकें?

बार-बार कलाइयों से की जाने वाली गतिविधियों से कलाई में दर्द होता है। इसके अतिरिक्त अधिकांश लोग टाइपिंग में बहुत समय व्यतीत करते हैं। जिसके कारण भी कलाइयों में दर्द उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में कुछ सावधानियों को बरतकर कलाइयों के दर्द को रोका जा सकता है जो निम्नलिखित हैं:

  • कलाई और आसपास के टेंडन में जलन को दूर करने के लिए अपने डेस्क सेटअप को बदल सकते हैं।
  • अपने कीबोर्ड को नीचे रखें ताकि टाइप करते समय आपकी कलाइयां झुकें नहीं।
  • लगातार देर तक टाइपिंग करने से बचें। थोड़े समय बाद नियमित ब्रेक लें और अपने हाथों को आराम दें।
  • कीबोर्ड, माउस और ट्रैक पैड के साथ रिस्ट रेस्ट का उपयोग करें।

कलाई के दर्द का इलाज-

पुराने और गंभीर दर्द से पीड़ित लोगों के लिए डॉक्टर निम्नलिखित सलाह देता है-

  • लक्षणों से राहत पाने के लिए मौखिक या इंजेक्शन दवाएं।
  • माध्यिका तंत्रिका पर दबाव के लिए कार्पल टनल सर्जरी।
  • संकुचित टेंडन का सर्जिकल उपचार।
  • गठिया के कारण होने वाले कलाइयों में दर्द के हड्डी से जुड़ीं सर्जरी। इसमें मुख्य रूप से कलाई का संभावित संलयन, हड्डी निकालना, या पूर्ण या आंशिक कलाई प्रतिस्थापन आदि शामिल हैं।
  • सूजन वाले ऊतक को हटाने के लिए सर्जन आर्थोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हैं।

स्व-देखभाल उपचार कलाई में दर्द को कम करता है। यह मोच या टेंडोनाइटिस के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं-

  • आराम करें- सूजन को कम करने के लिए जोड़ों को आराम दें। हालांकि, ज्यादा देर तक आराम न करें। यह कठोरता पैदा कर सकता है।
  • बर्फ से करें सिकाई-पहले दो दिनों तक हर 3 से 4 घंटे के अंतराल पर आइस पैक लगाएं। ऐसा कम से कम 20 मिनट तक करें।
  • संपीड़न-अपनी कलाई के चारों ओर एक लोचदार पट्टी लपेटें। उंगली के आधार से शुरू करें और कोहनी के ठीक नीचे जाएं। ऐसा करने से आराम पहुंचता है।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

निम्न लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-

  • जोड़ों या कलाइयों में असहनीय दर्द होने पर।
  • अधिक दर्द के कारण दैनिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न होना।
  • सुन्नता या झनझनाहट के बढ़ जाने पर।

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