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वैरिकोज नसें (veins) क्या है? जानें, इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

वैरिकोज नसें (veins) क्या है? जानें, इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

शारीरिक परेशानियां कई तरह की होती हैं। लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उन्हीं में से एक समस्या वैरिकोज नसें (veins) है। इस समस्या से ग्रसित व्यक्ति के पैर या किसी अन्य अंग की नस अचानक से अकड़ जाती है। इसके अलावा वैरिकोज नसें सूजी और मुड़ी हुई नसें होती हैं। जिसे त्वचा के नीचे देखी जा सकती है। कोई भी नसें वैरिकोज वेन्स हो सकती है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित नसें पैरों या पैरों के पंजों में होती हैं। जिसका मुख्य कारण खड़ा होने या घूमने से निचले हिस्सों में दबाव का बढ़ना होता है।  

 
क्या होता है वैरिकोज नसें? 

नसें (veins) ऊतकों से रक्त को हृदय की ओर ले जाने का काम करती है। नसों को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत रक्त को पैरों से हृदय तक ले जाना पड़ता है। ऊपर की ओर रक्त ले जाने के लिए इन शिराओं के अंदर वाल्व होते हैं। यह वाल्व रक्त को केवल ऊपर की ही ओर जाने देती है। लेकिन जब वाल्व कमजोर हो जाते हैं तो इस स्थिति में रक्त सही तरीके से ऊपर की ओर चढ़ नहीं पाता और कभी-कभी नीचे की ओर बहने लगता है। ऐसी दशा में नसें फूल जाती हैं और लंबाई बढ़ने के कारण यह नसें टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है। जिसे मेडिकल भाषा में वेरीकोज वेन्स (अपस्फीत शिरा) कहते हैं।  

 
वैरिकोज नसों के कारण-
 
बढ़ती उम्र- 

वैरिकोज नसें का सबसे बड़े कारणों में से एक है बढ़ती उम्र का होना। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर की नसों में खिंचाव होने लगती हैं। 40 से 50 साल तक हम और आप महसूस नहीं कर पाते हैं लेकिन इससे बाद की उम्र में कमजोरी महसूस होने लगती है। परिणामस्वरूप नसें अधिक नाजुक हो जाती हैं। जिसके कारण दिल की ओर बहने वाली रक्त विपरीत दिशा में बहने लगती है। जिससे नसों में रक्त इकठ्ठा हो जाता है और नसें सूजने लगती है। इसलिए इस उम्र में व्यक्ति को अपने शरीर के पीछे एक्टिव रहना बहुत जरुरी है।

 
महिलाओं में अधिक संभावना- 

 महिलाओं में वैरिकोज नसें (veins) होने की संभावना अधिक होती है। गर्भावस्था या पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव वैरिकोज नसें होने का खतरा बढ़ा देते हैं। इसके अलावा हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी एवं गर्भनिरोधक गोलियां भी वैरिकोज नसें जैसी समस्या उत्पन्न कर सकती है।

मोटापा-

 शरीर  का अधिक वजन भी नसों पर  दबाव डालता है। जिससे वैरिकोज नसें होने का खतरा बढ़ जाता है।

 
पारिवारिक रोग संबंधी कारक-
 यदि माता-पिता, भाई-बहन या अन्य पारिवारिक सदस्य पहले से वैरिकोज नसें से ग्रसित है। तो अन्य सदस्यों में भी यह रोग विकसित होने की संभावना काफी बढ़ जाती हैं।
 
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में खड़े या बैठे रहना-

 यदि कोई व्यक्ति लगातार या कई घंटों तक एक ही मुद्रा में खड़े या बैठे रहा जाए तो उसके नसों में खिंचाव बढ़ सकता है। जिससे रक्त का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति को वैरिकोज नसों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

 
वेरिकोज नसों के लक्षण-
  • नसों का रंग गहरी बैंगनी या नीली दिखना। 
  • नसों का आकार रस्सियों की तरह सूजी हुई या मुड़ी हुई दिखना। 
  • पैरों में भारीपन महसूस करना। 
  • पैरों के निचले हिस्सों में सूजन होना। 
  • मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन होना। 
  • लंबे समय तक खड़े या बैठें रहने के बाद दर्द का आभास होना। 
  • एक या इससे अधिक नसों के आसपास खुजली होना।
  • त्वचा के घाव का  आसानी से ठीक न होना। 
  • सूखी या पपड़ीदार त्वचा का देखना।
  • वैरिकोज नसों से बचने के उपाय-
  • प्रतिदिन शारीरिक गतिविधियां करें। 
  • अपनी  दिनचर्या में व्यायाम और योगा को जरूर शामिल करें। 
  • अधिक समय तक एक ही मुद्रा में बैठें या खड़े न रहें। 
  • ऊंची हील वाली  चप्पल या जूते न पहनें। 
  • सोते समय पैरों को सिर के लेवल से थोड़ा उठाकर रखें। 
  • मोटापा कम करने पर विशेष ध्यान दें। 
  • नमक एवं शक्कर को कम मात्रा में सेवन करें। 
  • तैलीय और वसायुक्त भोजन से परहेज करें। 
  • आइसक्रीम का सेवन न करें। 
  • शराब के सेवन से बचें। 
  • रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पिएं। 
  • पौष्टिक आहार  युक्त भोजन का सेवन करें। 
  • अपने भोजन में हरे पत्तेदार सब्जियां एवं फलों को शामिल करें। 
वैरिकोज नसों के घरेलू उपाय-
सेब का सिरका-

सेब का सिरका वैरिकोज नसों के लिए एक प्राकृतिक उपचारक है। यह शरीर की डिटॉक्सफाई करता है जिससे रक्त का संचार ठीक तरीके से होता है। जिससे वैरिकोज नसों में भारीपन एवं सूजन काफी हद तक कम हो जाता है। इसके लिए सेब के सिरके को प्रभावित अंगों पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। इस उपाय को नियमित रूप से रात को बिस्तर पर जाने से पहले और अगली सुबह निरंतर करना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक करने से वैरिकोज नसों  का आकार कम होने लगता है। इसके अलावा एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर पीने से बेहतर परिणाम मिलते हैं ।

 
लाल शिमला मिर्च-

लाल शिमला मिर्च को वैरिकोज नसों के इलाज के लिए बहुत कारगर माना जाता है। क्योंकि शिमला मिर्च विटामिन-सी एवं बायोफ्लेवोनॉयड्स से भरपूर होता है। जिससे यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाने और संतुलित सूजी हुई नसों के दर्द को कम करने में सहायक होती है। इसके लिए एक चम्मच लाल शिमला मिर्च के चूर्ण को गुनगुने पानी में मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

 
लहसुन-

लहसुन वैरिकोज नसों की वजह से होने वाले सूजन एवं दर्द को कम करने के लिए एक उत्कृष्ट जड़ी-बूटी है। यह रक्त वाहिकाओं में विषैले पदार्थों को निकालने एवं रक्त परिसंचरण में सुधार करने में सहायता करती है। इसके लिए 5 से 6 लहसुन की कलियां और संतरे का जूस लेकर एक साफ जार में रखें। अब इसमें जैतून के तेल को मिलकर इस मिश्रण को 12 घंटे के लिए रख दें। अब इस मिश्रण से कुछ बूंदों को हाथों में लेकर हल्के हाथों से सूजन वाली नसों पर मालिश करें। तत्पश्चात सूती कपड़ा लपेट कर रातभर के लिए छोड़ दें। इस उपाय को कुछ दिनों तक करने से लाभ मिलता है। साथ ही बेहतर परिणाम पाने के लिए अपने आहार में ताजे लहसुन की कलियों को भी शामिल करें।

 
जैतून का तेल-

वैरिकोज नसों के इलाज के लिए रक्त परिसंचरण को बढ़ाना बेहद जरुरी होता है। ऐसे में जैतून तेल की मालिश करने से रक्त परिसंचरण बढ़ने में मदद मिलती है। साथ ही सूजन और दर्द भी कम होता है। इसके लिए जैतून तेल को किसी कैरियर ऑयल में मिलाकर उसे गर्म कर लें। अब इस गर्म तेल से नसों की हल्के हाथों से मसाज करें। ऐसा 2 से 3 महीनों तक करने से इस समस्या से आराम मिलता है।

 
अखरोट- 

अखरोट रक्त-वाहिकाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी औषधि है। इसलिए यह वैरिकोज नसों के लक्षणों को आसानी से कम करती है। दरअसल, इसमें एस्ट्रिंजेंट, गल्लिक एसिड और कई तरह के मिनरल्स पाए जाते हैं। जो सूजन एवं दर्द को कम करने में मदद करते हैं। अखरोट के तेल में कॉटन या कपड़े को डुबोकर प्रभावित जगहों पर लगाने से लाभ मिलता है।   

 
अजमोद-

अजमोद विटामिन-सी से भरपूर एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। जो कोशिकाओं की मरम्मत एवं कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। इसके अतिरिक्त अजमोद में मौजूद रुटीन नामक तत्व, कोशिकाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, यह वैरिकोज नसों के लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। इसके लिए एक कप पानी में एक मुट्ठी ताजा अजमोद लेकर उसे कुछ देर तक उबालें। कुछ समय ठंडा होने के बाद इस मिश्रण में गुलाब और गेंदे की तेल की कुछ बूंदों को मिलाकर कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। अब इस मिश्रण को कॉटन पर लगाकर प्रभावित अंगों पर लगाएं। ऐसा कुछ दिनों तक करने पर इस समस्या से आराम मिलता है।

 
कब जाएं डॉक्टर के पास?
  • वैरिकोज नसों में असहनीय दर्द होने पर। 
  • घरेलू उपचार से ठीक न होने पर। 
  • पैरों के दर्द या सूजन,लालिमा एवं बुखार में अचानक वृद्धि होने पर। 
  • पैरों के घाव ठीक न होने पर।

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