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गले के इंफेक्शन का कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

गले के इंफेक्शन का कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

गलत लाइफ स्टाइल और मौसम में बदलाव की वजह से संक्रमण का होना आम बात है। जिसके कारण लोगों को सर्दी, जुकाम और फ्लू (इन्फ़्लूएंज़ा) जैसी बीमारियां आसानी से घेर लेती हैं। यह अक्सर गले में इंफेक्शन होने के कारण बनते हैं। गले में इंफेक्शन किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। यह एक संक्रमण है। जिसे बदलते मौसम का संकेत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को खाने, पीने और निगलने में असुविधा होती है।

 

गले में संक्रमण के लक्षण

ज्यादातर मामलों में गले के इंफेक्शन में सामान्यतः सर्दी एवं जुकाम जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। सर्दी के अन्य लक्षणों में नाक का बहना,गले का दर्द, खराश, कांटे जैसे चुभना, आंख की लालिमा एवं खुजली आदि होना शामिल हैं। गले में इस प्रकार की खराश कुछ वायरस के कारण भी होती है। जो लगभग एक सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाती है। गले में खराश होने के मुख्य दो कारण हैं। पहला जीवाणु (Bacteria) द्वारा और दूसरा विषाणु (virus) द्वारा। आइए चर्चा करते हैं इन्हीं कारणों से होने वाले लक्षणों के बारे में;

 

वायरस के कारण गले में होने वाले इंफेक्शन के लक्षण
  • गले में हल्का या बिल्कुल दर्द न होना।
  • निगलने में हल्की तकलीफ होना।
  • गले का लगातार सूखना।
  • जबड़े एवं गर्दन में दर्द का होना।
  • सिर में दर्द होना।
  • कभी-कभ��� गले की सूजी हुई लसीका ग्रंथि का दिखाई देना।
  • हल्का बुखार आना।
  • वायरस के कारण 4-5 दिनों तक गले में काटे जैसा चुभना।
  • सर्दी के सामान्य लक्षण जैसे नाक का बहना, आंखों की लाली और साइनस के कारण नाक का बंद होना आदि।
बैक्टीरिया के कारण गले में इंफेक्शन के लक्षण

सामान्यतः बैक्टीरिया के कारण होने वाले गले का संक्रमण वायरस की अपेक्षा अधिक गंभीर होता है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए इसका उपचार चिकित्सक की देखरेख में एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाना चाहिए। गले में इंफेक्शन जैसी समस्याएं लगभग एक-तिहाई बच्चों में बैक्टीरिया की वजह से ही होती हैं। आइए बात करते हैं इन लक्षणों के बारे में;

 

  • गले में असहनीय दर्द का महसूस होना।
  • निगलने में अत्यधिक तकलीफ होना।
  • गले की सूजी हुई लसीका ग्रंथि का दिखाई देना।
  • तेज बुखार का आना।
  • गले के अंदरूनी हिस्से में मवाद या टॉन्सिल पर सफ़ेद निशान का दिखाई देना।
  • दो सप्ताह से भी अधिक समय तक आवाज में भारीपन रहना।
  • सामान्य रूप से इस प्रकार की संक्रमण को ठीक होने में अधिक समय का लगना।
क्या होते हैं गले में इंफेक्शन के कारण?

गले में संक्रमण निम्न कारणों से हो सकता है। जिसका हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए।

 

  • स्ट्रेपकोकस नामक जीवाणु और रायनोवायरस नामक विषाणु का शरीर में प्रवेश करने पर।
  • किसी पदार्थ से एलर्जी होने पर।
  • गले में नमी के कम होने पर।
  • धूम्रपान करना।
  • टॉन्सिल की दिक्कत होना।
  • चिल्लाने या आवाज़ दबाने से।
  • रासायनिक धुएं या वायु प्रदूषण में सांस लेने से।
  • काली खांसी होने पर।
  • डिप्थीरिया का होना।
गले का संक्रमण होने पर ध्यान रखें यह बातें
  • अच्छे से आराम करें।
  • धूम्रपान करने से बचें।
  • प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें।
  • नमक वाले गर्म पानी से गरारे करें।
  • गले में संक्रमण होने पर लोज़ेंज या हार्ड कैंडी चूसें।
  • किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए भोजन करने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
  • छींकने और खांसने के बाद या शौचालय से आने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
  • तैलीय एवं वसायुक्त भोजन के सेवन से बचें।
  • आइसक्रीम, दही, बर्फ के पानी का बिल्कुल सेवन न करें।
  • संक्रामक एवं प्रदूषित वातावरण में जाने से बचें।
गले के संक्रमण के घरेलू उपाय
  • गले में संक्रमण होने पर दिन में दो से तीन बार सौंफ चबाकर खाएं।
  • ग्रीन टी में अदरक डालकर दिन में 2-3 बार पीने से गले के रोग में आराम पहुंचाता हैं।
  • गले के दर्द और गले से संबंधित किसी भी प्रकार के संक्रमण से राहत पाने के लिए चाय और सूप जैसे गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें।
  • अदरक में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। जो गले की सूजन और दर्द को दूर करता है। इसलिए किसी भी रूप में अदरक का इस्तेमाल करना गले के संक्रमण हेतु फायदेमंद होता है।
  • तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। जो बदलते मौसम में शरीर को होने वाली दिक्कतों से बचाने का काम करते हैं। तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को भी बढ़ाती है।
  • एक कप पानी में नीम की 4-5 पत्तियों को उबालकर पीना, गले के लिए काफी फायदेमंद होता है।
  • गले में इंफेक्शन हेतु काली मिर्च से बनी चाय का सेवन करना अच्छा होता है। क्योंकि काली मिर्च में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है। जो एक प्राकृतिक दर्द निवारक होता है। जो गले की खराश और दर्द में राहत दिलाता है।
  • जायफल और बरगामोट के तेल में कैफीन होता है। जिसका ठंडा, सुखदायक और ताजा प्रभाव गले के इंफेक्शन में आराम दिलाता है। इसलिए गले से संबंधित कोई परेशानी होने पर जायफल या बरगामोट तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • शहद युक्त मिश्रित चाय शुष्क गले के लिए अच्छे घरेलू उपचारों में से एक है। क्योंकि यह गले की परेशानी को कम करने में मदद करती है। इसलिए गले में खराश और खांसी होने पर यह चाय (शहद युक्त मिश्रित चाय) कारगर साबित होती है।
  • सेब का सिरका गले में दर्द और खांसी के लिए अच्छी दवाओं में से एक है। क्योंकि इसमें एसिटिक एसिड होता है। जिसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है। जो बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण से लड़ता है।
  • गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी डाल के सेवन करने से संक्रमण से बचाव होता हैं। क्योंकि हल्दी में संक्रमण को दूर करने की क्षमता होती है।
  • लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। जो गले के संक्रमण को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए लहसुन की 2 से 3 कलियों को अपने दांतों के बीच रखकर चूसने से फायदा होता है।

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