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जानें, अशोक वृक्ष के औषधीय लाभ, उपयोग और नुकसान

जानें, अशोक वृक्ष के औषधीय लाभ, उपयोग और नुकसान

आयुर्वेद में अशोक के पेड़ को हेमपुष्प या ताम्रपल्लव कहा जाता है। अशोक वृक्ष के विभिन्न भाग जैसे फूल, पत्ता आदि को महिलाओं की सेहत संबंधी समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसके पौष्टिक और उपचारात्मक गुणों के कारण बहुत-सी बीमारियों के लिए इसे आयुर्वेद में औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अशोक एक ऐसा वृक्ष है जिसमें कई गुण पाए जाते हैं। अशोक के पेड़ का उपयोग रोगों से छुटकारा दिलाने और शारीरिक दुख दूर करने के लिए हजारों साल से होता आ रहा है। यह मुख्य रूप से स्त्री रोग, रक्त बहने के विकारों और मूत्र संबंधित रोगों में काफी फायदेमंद है। अशोक की छाल कसैली, रूखी और स्वभाव से ठंडी होती है। अशोक के पत्ते लंबे होते हैं। जिसे लोग ताम्रपत्र कहते हैं। इसका फूल सुन्दर और सुगन्धित होता है। इसका फल फलियों के रूप में होता है। अशोक की छाल, पत्तों, फूलों और बीजों का प्रयोग दवा के लिए किया जाता है। इसकी छाल में टैनिन, कैटीकाल, उड़नशील तेल, कीटोस्टेरोल, ग्लाइकोसाइड, सेपोनिन, कैल्शियम और आयरन जैसे यौगिक पाए जाते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम सरका असोच (Saraca asoca) है।

अशोक वृक्ष को भारत, नेपाल और श्रीलंका में पवित्र माना जाता है। प्राचीन काल में शोक को दूर और प्रसन्नता लाने के लिए अशोक वाटिकाओं एवं उद्यानों का निर्माण कराया जाता था और इसी कारण अशोक के वृक्ष को शोकनाश, विशोक, अपशोक आदि भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में सनातनी वैदिक लोग तो इस पेड़ को पवित्र एवं आदरणीय मानते ही हैं, साथ में बौद्ध भी इसे विशेष आदर की दृष्टि से देखते हैं। क्योंकि कहा जाता है कि भगवान बुद्ध का जन्म अशोक वृक्ष के नीचे हुआ था।

 
अशोक वृक्ष के फायदे-
मासिक धर्म संबंधी विकारों में अशोक के पत्ते के फायदे-

अशोक का प्रयोग स्त्रीरोग की विभिन्न समस्याओं को दूर करने और महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी विकारों के इलाज में किया जाता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों और एंडोमेट्रियम के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। मासिक धर्म के समय बहुत अधिक खून आने की समस्या में अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। इसके उपयोग से मासिक धर्म नियमित हो जाएगा।

 
गर्भाशय को मजबूत करता है अशोक का अर्क-

बांझपन, गर्भाशय की कमजोरी, हार्मोन का असंतुलन, पेट के रोग और पेडू का दर्द (Pelvic pain) जैसी समस्याएं होने पर अशोकारिष्ट का सेवन करें। क्योंकि अशोकारिष्ट को अशोक के अर्क से बनाया जाता है। इससे आपको इन समस्याओं में फायदा होगा।

 
लिकोरिया से निजात दिलाए अशोक के औषधीय गुण-

अगर किसी को सफ़ेद पानी आने या लिकोरिया (Leucorrhoea) की समस्या है तो 1 चम्मच अशोक की छाल के चूर्ण का प्रतिदिन दो बार गाय के दूध के साथ सेवन करें। इसके सेवन से इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

 
सूजन को दूर करता है अशोक का वृक्ष-

अंडकोष (testicles) में सूजन होने पर एक सप्ताह तक अशोक की छाल का काढ़ा प्रतिदिन दो बार पिएं। इसके सेवन से अंडकोष की सूजन कम हो जाती है।

 
पेट में दर्द से राहत दिलाता है अशोक की छाल का काढ़ा-

पेट में दर्द की समस्या है तो अशोक की छाल को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बना लें और प्रतिदिन दो बार पिएं। इससे पेट दर्द से छुटकारा मिलेगा।

 
पथरी की समस्या में अशोक बीज के फायदे-

गुर्दे में पथरी की समस्या है तो अशोक के बीज को पीस लें और प्रतिदिन पांच-दस ग्राम की मात्रा का ठंडे पानी के साथ सेवन करें। इसके सेवन से पथरी की समस्या से निजात मिलेगा।

 
सांस संबंधी रोगों में लाभदायक है अशोक के बीज-

किसी को सांस रोग की समस्या है तो अशोक के बीजों का 65 मिली ग्राम चूर्ण पान के बीड़े में रख कर सेवन करें। इसके सेवन से कुछ ही दिनों में सांस रोग से छुटकारा मिल जाएगा।

 
योनि से असामान्य खून की समस्या में अशोक के पेड़ के लाभ-

अगर किसी को रक्त प्रदर, योनि से असामान्य खून निकलना, पेशाब से सम्बंधित समस्या है तो अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पिएं। इसके सेवन से इन समस्याओं से छुटकारा ���िल जाएगा।

 
अशोक वृक्ष के उपयोग
  • अशोक की छाल, फूल और बीज औषधीय रूप से उपयोग किए जाते हैं।
  • इसकी छाल का उपयोग पित्तदोष, योनि स्राव, जलन को ठीक करने के लिए किया जाता है।
  • अशोक वृक्ष के तने की छाल का उपयोग पेट के दर्द, पेचिश, अपच, बवासीर, अल्सर और गर्भाशय की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है।
  • इसकी छाल से त्वचा के रंग को सही करने के लिए भी उपयोग किया जाता है।
  • अशोक के फूलों को पीस कर रक्त पेचिश, मधुमेह, सिफलिस और गर्भाशय टॉनिक के लिए उपयोग किया जाता है।
  • इसके बीजों का पाउडर बजरी (छोटे दाने वाली पथरी) और लगातार पेशाब की शिकायत में उपयोग किया जाता है।
  • इसके फलों को सुपारी के विकल्प के रूप में चबाया जाता है।
  • अशोक के वृक्ष को पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे मंदिरों के पास लगाया जाता है।
  • इसकी छाल का उपयोग आंतरिक रक्तस्राव के मामलों में किया जाता है।
अशोक के पेड़ के नुकसान-
  • अशोक का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग या दवा के रूप में इस्तेमाल शरीर पर कोई हानिप्रद प्रभाव नहीं डालता। लेकिन इसका अत्यधिक प्रयोग एमेनोरिया (amenorrhoea) अर्थात मासिक धर्म के न होने की समस्या को और बिगाड़ देता है।
  • गर्भवती महिलाओं को अशोक वृक्ष का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि उनके लिए यह हानिकारक हो सकता है।
  • हृदय रोग के मरीज को इस जड़ी-बूटी को लेने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
कहां पाया जाता है अशोक का वृक्ष?

अशोक के वृक्ष भारतवर्ष में सर्वत्र बाग-बगीचों में तथा सड़कों के किनारे सुन्दरता के लिए लगाए जाते हैं। यह वृक्ष पश्चिमी प्रायद्वीप में 750 मी की ऊंचाई पर मुख्यतः पूर्वी बंगाल, बिहार, उत्तराखंड, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में साधारण रूप से नहरों के किनारे व सदाहरित वनों में पाए जाते हैं।

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