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जानें, दालचीनी के फायदे, उपयोग और नुकसान के बारे में

जानें, दालचीनी के फायदे, उपयोग और नुकसान के बारे में

दालचीनी क्या है?

 

दालचीनी (Cinnamon) एक सुगंधित मसाला है, जो आम तौर पर हर रसोई घर में पाई जाती है। इसकी तासीर गर्म होती है। यह सिनेमन (Cinnamon) नाम के पौधे के तने और शाखाओं की छाल से प्राप्त होती है। यह रंग में भूरी और आकार में पतली होती है। इसके फलों के भीतर से तारपीन जैसी गन्ध आती है। इसके छोटे फूल सफेद और हरे रंग के होते हैं। दालचीनी के पत्तों का उपयोग खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। जिसे तेजपत्ता के नाम से जाना जाता है। पर इसका प्रयोग केवल मसाले के तौर पर ही नहीं बल्कि कई बीमारियों से बचाव में भी होता है। दालचीनी सेहत के लिए बहुत गुणकारी मानी जाती है।

 

आयुर्वेद में दालचीनी का महत्त्व-

 

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार दालचीनी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। जो तमाम बीमारियों से शरीर को बचाने में सक्षम हैं। दालचीनी शरीर में मेटाबॉलिज्म को बेहतर करती है। जिससे वजन को नियंत्रित रखना आसान होता है। दालचीनी में मौजूद रसायन कई औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। जो सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए लाभदायक माने जाते हैं। सुश्रुत-संहिता व कई प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रथों में भी दालचीनी के औषधीय उपयोग का वर्णन किया गया है। 

 

दालचीनी के फायदे ;

 

मधुमेह को नियंत्रित रखने में फायदेमंद है दालचीनी-

 

दालचीनी इंसुलिन की प्रतिक्रिया को बढ़ाकर ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाये रखने में शरीर की मदद करती है। यह टाइप-2 मधुमेह पर सकरात्मक प्रभाव डालती है। जिससे मधुमेह रोगी को एक स्वस्थ जीवन व्यतीत करने में सहायता मिलती है। इसलिए मधुमेह रोगियों द्वारा अपने दैनिक आहार में दालचीनी को शामिल करना उन्हें बेहद लाभ पहुंचाता है। दूध में दालचीनी डाल कर पीना भी मधुमेह में फायदेमंद होता है।

 

हृदय की रक्षा करने में सहायक है दालचीनी-

 

दालचीनी में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं। जो दिल और उसके आसपास की धमनियों को नुकसान और संक्रमण से बचाते हैं। इसके एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण आंतरिक ऊतकों (Tissue) की सूजन को ठीक करने और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने में सहायता करते हैं। दालचीनी पाउडर का शहद के साथ सेवन करने से हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है। 

 

दिमाग की कार्यशीलता बढ़ाती है दालचीनी-

 

अनेक शोधों के परिणामस्वरूप दालचीनी के सेवन से मानसिक सतर्कता में सुधार आता है। इस अद्भुत मसाले की सुगंध दिमाग को सक्रिय करती है। दालचीनी का नियमित उपयोग स्मरण शक्ति और कार्यशील स्मृति में सुधार ला सकता है। इसके अलावा दालचीनी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, पार्किंसन और अल्जाइमर जैसे गुण तंत्रिका से संबंधित विकारों को विकसित होने से रोकते हैं।

 

 कैंसर से बचाव में लाभदायक है दालचीनी-

 

दालचीनी का सेवन कैंसर की कोशिकाओं को फैलने से रोकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, ल्यूकेमिया और लिम्फोमा गुण कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि दर को कम करने में फायदेमंद होते हैं। दालचीनी में पाए जाने वाला सिनामाल्डेहाइड (Cinnamaldehyde) नामक यौगिक कैंसर ट्यूमर की वृद्धि को रोकने और डीएनए को क्षति से बचाने का काम करता है। 

 

गठिया के दर्द को कम करने में सहायक है दालचीनी- 

 

दालचीनी गठिया दर्द से जुड़े साइटोकिन्स (cytokines) को कम करने में सहायता करती हैं। सुबह-शाम शहद में दालचीनी पाउडर मिलाकर सेवन करने पर हफ्तेभर में गठिया दर्द में आराम मिलने लगता है।

 

आंखों के रोग में आरामदायक है दालचीनी-

 

दालचीनी का तेल आंखों के ऊपर पलकों पर लगाने से आंखों का फड़कना (Twitching Eye) बन्द हो जाता है। इसके अतिरिक्त दालचीनी के उपयोग से आंखों की रोशनी में भी वृद्धि होती है।

 

हिचकी में राहत दिलाती है दालचीनी-

 

हिचकी आना एक साधारण सी क्रिया है। परन्तु कई लोगों को हमेशा हिचकी आने की शिकायत रहती है। ऐसे लोगों के लिए दालचीनी का काढ़ा पीना आरामदायक होता है।  

 

दालचीनी के उपयोग;

 
  • दालचीनी का प्रयोग मसाले के तौर पर खाने को सुगंधित व स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है।
  • दालचीनी का उपयोग च्यवनप्राश बनाने के लिए भी किया जाता है।
  • दालचीनी को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाता हैं।
  • इसका सेवन सिनेमन चाय के तौर पर भी किया जाता है।
  • दालचीनी को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाया जाता है। इससे चेहरे की रंगत में निखार आता हैं।
  • दालचीनी को हर्बल-टी और काढ़ा बनाते समय भी उपयोग में लाया जाता है।
  • बालों को पोषण देने के लिए दालचीनी को उबालकर इसके पानी से बालों को धोया जाता है। 

दालचीनी के प्रकार;

 

दालचीनी दो प्रकार की होती है। पहली कैसिया दालचीनी और दूसरी सीलोन दालचीनी।

 

कैसिया दालचीनी (Cassia cinnamon)-

 

रसोई घरों में मसाले के रूप में प्रयोग की जाने वाली दालचीनी को कैसिया दालचीनी कहा जाता है। इसका स्वाद अधिक तीखा होता है। इसे रेग्युलर सिनेमन भी कहते हैं।

 

सीलोन दालचीनी (Ceylon cinnamon)-

 

सीलोन दालचीनी स्वाद में कैसिया से लाइट होता है। इस दालचीनी को ट्रयू सिनमन के नाम से भी जाना जाता है। यह क़्वालिटी में सबसे अच्छी मानी जाती है। सीलोन दालचीनी में कुमेरिन नामक तत्व की मात्रा कम होती है। इस कारण इसका उपयोग सर्वाधिक रूप से किया जाता है। यह कैसिया की तुलना में अधिक महंगी होती है। 

 

दालचीनी के नुकसान; 

 

स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होने के बावजूद दालचीनी का अत्याधिक सेवन शरीर को निम्न प्रकार से नुकसान पहुंचा सकता है। 

 
  • दालचीनी का अधिक मात्रा में सेवन करना लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है ।
  • दालचीनी का अधिक सेवन एलर्जी का कारण बनता है।
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दालचीनी का सेवन करने से पहले डॉक्टर का परामर्श लेना चाहिए। 

कहां पाई जाती है दालचीनी?

 

भारत में दालचीनी की खेती मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल में की जाती है। दक्षिण-पश्चिमी भारत के समुद्र-तटीय एवं निचले पहाड़ी क्षेत्रों में भी दालचीनी पाई जाती है।

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