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अश्वगंधा

अश्वगंधा

अश्वगंधा प्राचीन काल से आयुर्वेद में उपयोग होने वाली एक कारगर औषधि है। सालों से इसका इस्तेमाल कई बीमारियों के लिए होता आया है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार इसका प्रयोग कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसमें अच्छे स्वास्थ्य के लिए कई छोटे-बड़े गुण समाहित हैं। इसके फायदों में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने, कैंसर से लड़ने, स्ट्रेस और चिंता को कम करने, पुरुषों में यौन क्षमता बढ़ाने, गठिया और अस्थमा को रोकना शामिल हैं। इसके अलावा अश्वगंधा शरीर में  एंटीऑक्सिडेंट की आपूर्ति करती है और प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को मजबूत करती है। इसमें जीवाणुरोधी (antibacterial) और रोगरोधी (anticonvulsant) गुण भी होते हैं, जो शरीर और मस्तिष्क के लिए कई अन्य लाभ प्रदान करते हैं।

 

अश्वगंधा का विवरण-

 

अश्वगंधा एक झाड़ीदार पौधा है। जिसके बीज, फल, जड़ों और पत्तियों से कई प्रकार की दवाइयां बनाई जाती है। इसे बाराहरकर्णी (बारहमासी) पौधा और असगंध भी कहते हैं। इसको आमतौर पर भारतीय जिन्सेंग के रूप में जाना जाता है। इसकी लम्‍बाई तीन फीट या इससे अधिक हो सकती है। विभिन्न देशों में अश्वगंधा कई प्रकार की होती है, लेकिन असली अश्वगंधा से घोडे़ के समान गंध आती है। इस की ताजी जड़ों में यह गंध अधिक तेज होती है, जो पौरूष ताकत बढ़ाने के काम आती है। वनों में पाए जाने अश्वगंधा की तुलना में खेती करके उगाए जाने वाले अश्वगंधा की गुणवत्‍ता अच्‍छी होती है। लेकिन तेल निकालने के लिए वनों में पाया जाने वाला इस का पौधा ही अच्‍छा माना जाता है।

 

अश्वगंधा के फायदे;

 

भारत में इसका प्रयोग प्राचीनकाल से ही एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में किया जाता है। आयुर्वेद में इसका इस्‍तेमाल पत्ते और चूर्ण के रूप में किया जाता है, जिससे कई प्रकार के रोग दूर होते हैं। इसके प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:-

 

बुखार- 

 

अश्वगंधा के चूर्ण और गिलोय के जूस को मिलाकर, गुनगुने पानी या शहद के साथ सेवन करने से बुखार ठीक होता है।

 

बैक्टीरियल संक्रमण-

 

अश्वगंधा बैक्टीरिया संक्रमण को नियंत्रित करता है। दरअसल, इस में जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जो श्वसन तंत्र, जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल), मूत्रजनन संबंधी रोगों को कम करते हैं।

 

संधिवात (सूजन एवं जोड़ों का दर्द)- 

 

अश्वगंधा में मौजूद अल्कलाइड्स, सपोनिंग और स्टेरॉइडल लैक्टोन्स आदि गुण होते हैं, जो सूजन और जोड़ों के दर्द में राहत देने का काम करते हैं।

 

 तनाव, चिंता और अवसाद- 

 

अश्वगंधा में ऐसे एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करते हैं। इसके उपयोग से मनुष्य पर सुखद और शांत प्रभाव पड़ता हैं।

 

कैंसर- 

 

अश्वगंधा ट्यूमर सेल्स को बढ़न से रोकता है। साथ ही यह कैंसर के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को भी कम करता है।

 

ह्रदय- 

 

अश्वगंधा  में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तनाव और सूजन को कम करने से साथ ह्रदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह ह्रदय की मासपेशियों को मजबूत बनाता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिराइड की मात्रा कम होती है, जो हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है।

 

रक्त विकार और शारीरिक कमजोरी- 

 

अश्वगंधा और चिरायता के चूर्ण को मिलाकर, सुबह-शाम सेवन करने से रक्त (खून) संबंधी समस्‍याएं ठीक होती हैं। इसके अलावा इसी चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सुबह-शाम लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

 

वीर्य (शुक्राणु)-

 

व्यक्ति के यौन संबंधी रोग के लिए ये रामबाण औषधि है। यह पुरुषों में शुक्राणु (Sperm) बढ़ाने में मदद करता है। इसके सेवन से वीर्य गाढ़ा होता है।

 

त्वचा- 

 

अश्वगंधा में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स त्वचा पर पड़ने वाले उम्र बढ़ने के संकेत जैसे- काले धब्बे एवं झुर्रियों आदि को कम करता है। ये स्किन कैंसर के खतरे को भी कम करता है।

 

घाव- 

 

अश्वगंधा की जड़ों का पेस्ट घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है और चोट तेजी से ठीक होती है।

 

बाल-

 

अश्वगंधा बॉडी में कोर्टिसोल के लेवल को कम करके बाल झड़ने की समस्या को कम करता है। इसे इस्तेमाल से बालों की जड़े मजबूत होती हैं।

 

आंख-

 

इसमें मौजूद साइटोप्रोटेक्टिव और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण, मोतियाबिंद एवं आंखों से संबंधित अन्य समस्या को कम करते हैं।

 

कब्‍ज और छाती- 

 

अश्वगंधा चूर्ण के सेवन से पेट संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। अश्वगंधा और बहेड़ा चूर्ण को मिलाकर गुड़ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म होते हैं। साथ ही इसके चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्‍ज और छाती के दर्द में आराम मिलता है।

 

खांसी- 

 

अश्वगंधा से कुकुर खांसी (काली खांसी) या वात से होने वाले कफ की समस्या में विशेष लाभ होता है। इसके पत्ते, बहेड़े का चू��्ण, कत्था चूर्ण, काली मिर्च और सैंधा नमक आदि से बना काढ़ा पीने से पुरानी खांसी में आराम मिलता है। टीबी के कारण से होने वाली खांसी में भी ये विशेष लाभदायक है।

 

गले के रोग (गलगंड)-   

 

अश्वगंधा पाउडर और पुराने गुड़ को बराबार मात्रा में मिलाकर सुबह-सुबह बासी पानी के साथ लेने से गले के रोग या गलगंड में लाभ होता है।

 

इंद्रिय दुर्बलता-

 
  1. अश्वगंधा के चूर्ण को कपड़े से छानकर उसमें बराबर मात्रा में खांड मिलाकर गाय के ताजे दूध के साथ सुबह के भोजन से तीन घंटे पहले सेवन करने से इंद्रिय दुर्बलता (कमजोर पेनिस की समस्या) कम होती है।
  2. इस की जड़ों के चूर्ण को चमेली के तेल में मिलाकर पेनिस पर लगाने से इंद्रिय दुर्बलता दूर होती है।
 

अश्वगंधा से होने वाले नुकसान-

 

अनगिनत फायदों वाले अश्वगंधा का अधिक मात्रा में या सही तरीके से सेवन न करना शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आइये जानते हैं इससे जुड़े कुछ नुकसानों के बारे में-

 
  • अश्वगंधा का इस्तेमाल आमतौर पर नींद के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। किन्तु बहुत दिनों तक इसका सेवन आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है।
  • इसके सही मात्रा में प्रयोग न करने से आपको जी मिचलाने (मितली) और उल्टी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
  • इसका अधिक मात्रा में प्रयोग करना आपको थकान, बुखार और दर्द जैसी शिकायत भी दे सकता है।
  • अश्वगंधा का अधिक मात्रा में इस्तेमाल करना पेट के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसको सही ढंग से न लेने पर डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती हैं। इसलिए इसके सेवन से पूर्व डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • बल्ड प्रेशर की समस्या से ग्रस्त लोगों को अश्वगंधा डॉक्टर के परामर्श के बिना कभी नहीं लेना चाहिए। जिन लोगों का बीपी कम रहता है, उन्हे खासतौर पर इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

कहा पाया जाता है अश्वगंधा?

अश्वगंधा औषधि का पौधा ख़ासतौर से महाराष्ट्र,मध्य प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में 5000 फीट की ऊँचाई तक मूल रूप से पाया जाता है। मध्य प्रदेश के पश्चिमोत्तर जिले मंदसौर स्थित मनासा तहसील में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है, अश्वगंधा की सारे भारत की व्यावसायिक पूर्ति इसी स्थान से होती है। पहले यह नागौर (राजस्थान) में बहुत अधिक मात्रा में होता था और वहीं से हर जगह भेजा जाता था। इसलिए तब इस को “नागौरी असगंध” भी कहा जाता था।

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