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भांग बीज तेल का महत्व, फायदे और नुकसान

भांग बीज तेल का महत्व, फायदे और नुकसान

भांग एक मिश्रण है। जो भांग (कैनबिस सैटाइवा) पौधे की कलियों और पत्तियों को भिगोकर, सुखाकर, पीसकर पेस्ट के रूप में बनाया जाता है। वैसे तो नशीले पदार्थो का सेवन करना अच्छा नहीं होता। लेकिन भांग के बीजों का सही तरीके और सही मात्रा में उपयोग करें तो यह शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। 

 

क्या होता है भांग के बीज का तेल?

भांग के बीज भांग के पौधे से मिलते हैं। इन्हीं बीजों से भांग का तेल तैयार किया जाता है। भांग के बीजों का आकार अलसी के बीज के समान हरे रंग का होता है। इसमें टेट्रा हाइड्रो कैनाबिनोल (THC) के रेशे पाए जाते हैं। जिनसे नशा होता है। इसके अलावा भांग के बीज या तेल में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड, कैनाबिनोइड, प्रोटीन, विटामिन-ई और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिसके कारण आयुर्वेद में भांग के बीजों को गुणकारी माना जाता है। 

 

आयुर्वेद में भांग बीज के तेल का महत्व-

आयुर्वेदिक चिकित्सा में भांग के बीज का तेल एक बड़ी भूमिका निभाता है। यह मतली, उल्टी और शारीरिक दर्द सहित कई बीमारियों के उपचार के रूप में जाना जाता है। कैनबिस (Cannabis) या भांग एक ऐसा पदार्थ है, जो व्यापक रूप से अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इसमें कैनाबिनोइड नाम का तत्व पाया जाता है। जो कफ और पित्त जैसी समस्या से छुटकारा दिलाता है। भांग में कई अलग-अलग प्रकार के कैनाबिनोइड्स होते हैं। लेकिन आयुर्वेद में टेट्रा हाइड्रो कैनाबिनोल (THC) कैनाबिडियोल (सीबीडी) को सर्वोत्तम माना गया है। 

 

सीबीडी और टीएचसी दोनों में एक आणविक संरचना होती है। जो शरीर में प्राकृतिक रूप से निर्मित यौगिकों के समान होती है। जिसे एंडोकेनाबिनोइड्स के रूप में जाना जाता है। एंडोकैनाबिनोइड्स शरीर के कैनाबिनोइड रिसेप्टर्स से जुड़ते हैं। जो व्यक्ति के सीखने, स्मृति, निर्णय लेने और प्रतिरक्षा जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं। 

 

भांग तेल के फायदे;

त्वचा संबंधी बिमारियों में कारगर -

 

भांग के बीज त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। भांग के बीजों में एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होता है। जो त्वचा संबंधी बीमारी को दूर रखने में सहायता करता है। इसके अलावा भांग के बीज में ओमेगा-6 फैटी एसिड के मौजूदगी के कारण त्वचा में नए सेल पैदा होते हैं। जिससे त्वचा स्वस्थ रहती है। भांग के बीज खून की अच्छी तरह से सफाई करते हैं। परिणामस्वरूप त्वचा संबंधी तमाम रोग आसानी से ठीक होते हैं।

 

पाचन के लिए सहायक -

 

पाचन शक्ति को स्वस्थ्य रखने के लिए फाइबर की आवश्यकता होती है। जो भांग के बीज में भरपूर रूप से मौजूद होता है। भांग के बीज में लगभग 80% अघुलनशील और 20% घुलनशील फाइबर पाया जाता है। घुलनशील फाइबर जेल जैसे होते हैं, जो शरीर में पाचन बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। इससे ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी सही रहता है। अघुलनशील फाइबर आंतों की अच्छी तरह से सफाई करता है। यह दोनों फाइबर पाचन क्रिया को पूरा करने में सहायक होते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि सही मात्रा में भांग का सेवन करने से पाचन शक्ति स्वस्थ रह सकती है।

 

दिल के लिए फायदेमंद -

 

भांग के बीज में अमीनो एसिड आर्जिनिन पाया जाता है। जिससे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड बनता है। यह नाइट्रिक ऑक्साइड ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाएं) को पतला करने में सहायता करता है। जिससे रक्तचाप सामान्य बना रहता है। रक्तचाप सामान्य बने रहने से दिल की बीमारियां दूर रहती है।

 

मधुमेह में लाभदायक -

 

भांग बीज के तेल में ओमेगा-3 पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड उपस्थित होता है। जो मधुमेह के रोगियों के लिए टाइप1डायबिटीज के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

 

बालों के लिए फायदेमंद -

 

भांग के बीज में प्रोटीन, विटामिन-ई और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं। जो दाढ़ी और बालों को लंबा, घना, और कुदरती चमकदार बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा भांग के तेल में मौजूद एसिड नाजुक बालों को मजबूत करने में भी मदद करता है।

 

मष्तिष्क के लिए लाभप्रद -

 

भांग के बीज में मौजूद आवश्यक फैटी एसिड अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) और पार्किंसंस रोग, जोकि मस्तिष्क को कमजोर बनाते हैं। इन परिस्थितियों को दूर करने में सहायक होता है। भांग के बीज याददाश्त को बढ़ाने में मदद करते हैं और मस्तिष्क थकान, चिंता और अवसाद को दूर करते हैं।

 

अनिद्रा को दूर करने में सहायक - 

 

भांग के बीज में मैग्नीशियम की मौजूदगी अनिद्रा का इलाज करने में सहायता प्रदान करती है। एंजाइमों और हार्मोन पर मैग्नीशियम की प्रतिक्रिया के वजह से अच्छी नींद आती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति अनिद्रा से पीड़ित हैं तो भांग के बीज का सही उपयोग करके इस परेशानी को दूर कर सकता है। 

 

भांग के बीज का उपयोग-

भांग के बीज को उपयोग करने के तरीके निम्नलिखित हैं

  • भांग के बीज को दूध में मिलाकर सेवन किया जा सकता है। 
  • भांग के बीज को स्मूदी (Smoothie) में डालकर इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • सलाद के ऊपर भांग के बीज के तेल को मिलाकर उपयोग कर सकते हैं। 
  • भांग के बीज को पीसकर दलिया और दही में मिलाकर सेवन किया जा सकता है।

भांग बीज के तेल का घरेलू उपचार-

  • भांग की पत्त‍ियों का अर्क निकालकर या भांग तेल की 2-3 बूंदों को कान में डालने से सिरदर्द पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। 
  • कोई घाव होने पर, भांग की पत्त‍ियों का लेप घाव पर लगाएं। ऐसा करने से घाव जल्दी भरता है और कोई अन्य परेशानी भी नहीं होती।
  • शरीर के किसी अंग पर सूजन होने पर भांग का तेल या भांग के पत्तियों का पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन दूर होती है। 
  • यदि त्वचा अत्यधि‍क रूखी या खुरदुरी है, तो भांग की पत्त‍ियों का इस्तेमाल त्वचा को चिकना बनाने में सहायता करता है। इसके लिए भांग की पत्त‍ियों को पीसकर लेप तैयार करें और उसे त्वचा पर लगाएं। 
  • भांग के बीज प्रोटीन और कई अमीनो एसिड के मौजूदगी के कारण, कैलोरी को जलाने वाली मांसपेशियों के विकास के लिए अहम हैं। व्यायाम करने के उपरांत भांग के कुछ बीजों का जूस या शेक पीना फायदेमंद होता है। 
  • भांग का तेल या भांग के पेस्ट का सही उपयोग गठिया के लिए भी लाभप्रद साबित होता है। 
  • कम मात्रा में भांग का सेवन आपकी इंद्रि‍यों और संवेदनाओं की तीव्रता में इजाफा करता है। यह स्पष्ट सुनाई और दिखाई देने में मददगार है। इसके अतिरिक्त भांग का सही सेवन खराब मूड को सुधारने का भी काम करता है।

भांग के तेल के नुकसान-

  • भांग के बीज में वसा की मात्रा ज्यादा होती है। जिसका अधिक सेवन पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। इससे हल्के दस्त और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। 
  • यदि किसी भी व्यक्ति का चिकित्सकीय उपचार चल रहा है तो भ���ंग के बीज का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक का परामर्श जरुर लें। 
  • भांग के बीज का अधिक सेवन करने से मस्तिष्क संबंधी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। 
  • जिन लोगों को भांग के बीज से एलर्जी है। उन्हें भी भांग के बीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 
  • जो लोग एंटीकोगुलेंट दवाओं का सेवन कर रहे हैं। उन लोगों को भांग के बीज का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह खून में प्लेटलेट्स को तोड़ सकता है। जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। 
  • गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा हो सकता है।

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